Sunday, 29 August 2010

चल झील किनारे

चल झील किनारे चलते हैं.

चल झील किनारे चलते हैं.

जहां फूल कमल के खिलते हैं.

जहां पंछी रोज उतरते हैं.

जहां बारिश रोज बरसती है.

जहां बातें प्यार कि होती हैं.

जहां खुशबू हर सिम्त रहती है.

जहां नफरत से सबको नफरत है.

जहां ख्वाब सुहाने आते हैं.

जहां जख्मी रूहें भी खुश हो जाते हैं

चल जील किनारे चलते हैं…..

चल झील किनारे चलते हैं……

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